स्वयं सिद्ध मुहूर्त (शुभ दिवस)

 स्वयं सिद्ध मुहूर्त (शुभ दिवस)

प्रचलित मान्यता है या ऐसा माना जाता है या कहा जाता है कि "यदि कोई कार्य किसी शुभ समय या काल में आरम्भ किया जाय तो उसकी सफलता की पूरी सम्भावना रहती है" और इसको मान लेने में कोई बुराई भी नहीं है क्योंकि यह एक सकारात्मक सोच को भी दर्शाती है लेकिन किसी आम इंसान के लिए किसी भी कार्य को आरम्भ करने के लिए किसी शुभ काल या समय को जानना असंभव नहीं तो अत्यंत मुश्किल अवश्य है क्योंकि इसके लिए निःसंदेह किसी ज्ञानी एवं अनुभवी ज्योतिषी से ही परामर्श लेना होगा और यह सभी के लिए सदैव संभव नहीं है इसलिए भारतीय वैदिक ज्योतिष के अनुसार प्रत्येक वर्ष में पांच ऐसे दिन निर्धारित हैं जिस दिन कोई भी शुभ कार्य आरम्भ करने के लिए किसी से कुछ भी पूछने की कोई आवश्यकता नहीं है और इसीलिए इन्ही पांच दिनों को स्वयं सिद्ध मुहूर्त (शुभ दिवस) के नाम से जाना या माना जाता है इन पांच स्वयं सिद्ध मुहूर्त (शुभ दिवस) का विवरण निम्नलिखित है :- ------------------------ (1) चैत्र मास, शुक्ल पक्ष, प्रतिप्रदा अर्थात चैत्र नवरात्री का पहला दिन (2) चैत्र मास, शुक्ल पक्ष, नवमी अर्थात श्री रामनवमी (3) वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, तृतीया अर्थात अक्षय तृतीया (4) आश्विन मास, शुक्ल पक्ष, दशमी अर्थात विजय दशमी अर्थात दशहरा (5) माघ मास, शुक्ल पक्ष, पंचमी अर्थात वसंत पंचमी या श्री पंचमी ------------------------ # विशेष बात यह है कि ये सभी स्वयं सिद्ध शुभ दिवस शुक्ल पक्ष में ही आते हैं # उपरोक्त विवरण से सम्बंधित और अधिक स्पष्टीकरण के लिए आप किसी भी शिक्षित, ज्ञानी, अनुभवी एवं विश्वसनीय ज्योतिषी से भी परामर्श कर सकते हैं # मेरा व्यक्तिगत रूप से सभी को परामर्श है कि इन दिनों में कोई ना कोई शुभ कार्य अवश्य आरम्भ करें ------------------------ आज समाज में आत्मविश्वास बढ़े और अन्धविश्वास भागे इसी के सन्दर्भ में मैनें यह लेख अपने अभी तक के प्राप्त ज्योतिषीय ज्ञान, ज्योतिषीय शिक्षा, ज्योतिषीय अनुभव, सामाजिक अनुभव, एवं व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर लिखा है 🙏🌹🌹🙏 अग्रिम शुभकामनायें सुभाष वर्मा ज्योतिषाचार्य
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