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ज्योतिषीय दृष्टिकोण में सुःख एवं दुःख

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  ज्योतिषीय दृष्टिकोण में सुःख एवं दुःख भारतीय ज्योतिष के अनुसार किसी के भी जीवन में सुःख एवं दुःख से सम्बंधित जो भी प्राप्ति होती है वह जन्मकालीन योग एवं ज्योतिषीय महादशा, अंतरदशा, प्रत्यन्तर्दशा और इनके ग्रहों के गोचर के ऊपर ही निर्भर रहती है... लेकिन इसका एक दूसरा पहलू यह भी है कि इंसान के जीवन में चाहे कोई भी दशा हो और ग्रह गोचर कैसा भी हो एवं कुंडली में कोई भी योग हो और चाहे कितनी भी संख्या में योग हों, अधिकतम सुख 40% और न्यूनतम दुःख 60% ही निर्धारित है...! -------------------------------- अधिक स्पष्टता के लिए, सदैव स्मरण रहे कि, ज्योतिषीय व्यवस्था में किसी के भी जीवन में अधिकतम सुख 40% ही निर्धारित है अर्थात कोई भी व्यक्ति इससे अधिक तो दूर की बात है इतना भी नहीं पा सकता है... और न्यूनतम दुःख 60% ही निर्धारित है अर्थात इस सीमा को कोई भी व्यक्ति कम नहीं कर सकता बल्कि इसमें बृद्धि ही करता है...! उपरोक्त दोनों स्थितियां सभी ग्रहों के उनके सभी बारह भावों में गोचर पर निर्धारित होती हैं ...! ------------------------------------ उदहारण के लिए सूर्य ग्रह अपने गोचर के समय में एक राशि म...

6-8-12 का जाल

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  6-8-12 का जाल मैं पिछले 10 साल से परेशान हूँ मेरा कोई काम नहीं हो पा रहा है मैनें सारे उपाय कर लिए फिर भी कुछ लाभ नहीं मिला मैनें लाखों रुपये फूंक दिए फिर भी कुछ नहीं हुआ अब मेरा ज्योतिष और ज्योतिषी पर से विश्वास पूरी तरह से उठ गया है ज्योतिषी के रूप में ऐसी बातें जातक से हमें अक्सर सुनने को मिलती ही हैं --------------------------------- ज्योतिष के नजरिये से बात करें तो 6, 8, 12, भाव, कष्टकारी भाव के रूप में देखे जाते हैं और पहली बात यह कि कुंडली के 6, 8, 12, भावों के भावेश की जब भी महादशा, अन्तर्दशा, प्रत्यंतर दशा होगी तब स्थितियां प्रतिकूल ही होंगीं दूसरी बात 6, 8, 12, भावों में बैठे ग्रह की जब भी महादशा, अन्तर्दशा, प्रत्यंतर दशा होगी तब स्थितियां प्रतिकूल ही होंगीं तीसरी बात गोचर में जब भी लग्न या लग्नेश 6, 8, 12, भाव या इनके भावेशों से पीड़ित होगा तब स्थितियां प्रतिकूल ही होंगीं -------------------------------- यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि 6, 8, 12, भावों या इनके भावेशों से कोई भी कभी भी अछूता नहीं रहता है अर्थात जितने अधिक उपरोक्त वर्णित स्थितियां बनेंगीं उतने अधिक कष्ट ...

जातक ना बनें ज्योतिषी

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  जातक ना बनें ज्योतिषी जातक उस व्यक्ति को कहा जाता है जो ज्योतिषी के पास परामर्श के लिए जाता है, आजकल आधे-अधूरे ज्ञान या जानकारी से लैस जातकों की भरमार है अर्थात किसी ज्योतिषी के पास परामर्श के लिए जाने से पहले वह सोशल मीडिया और ऑनलाइन लिंकों पर बहुत कुछ जान लेता है (ऐसा उसको लगता है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है सिवाय ग़लतफ़हमी के) अपने हर सवाल के जबाब के लिए गूगल पर आश्रित जातकों की संख्या तेज़ी से बढ़ती जा रही है और आज नौजवान पीढ़ी लगभग पूरी तरह इसके गिरफ्त में है, नतीजा सहज रूप से देखा जा सकता है कि परिणाम क्या निकल कर आ रहा है विशेषकर विवाह से पहले या विवाह के बाद वाले जीवन के सम्बन्ध में...! सोशल मीडिया और ऑनलाइन लिंकों पर प्राप्त जानकारी से लैस जातक खुद ही ज्योतिषी को अपनी जानकारी के हिसाब से ही रत्नों को धारण करने की बात करता है या फिर पूजा-पाठ या मंत्र जाप के लिए भी जोर देता है बिना यह समझे कि क्या सही है या क्या गलत है और ऐसे में ज्योतिषी भी कभी कभी नहीं बल्कि अक्सर भ्रमित हो जाता है, ऐसा मेरा व्यक्तिगत अनुभव भी है... जातक की इस कृति से केवल उसी का नुक्सान होता है और वह सही परामर्श स...

दिशा-संभावना-परिणाम

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  दिशा-संभावना-परिणाम आजकल ज्योतिष और ज्योतिषी से लोगों की शिकायतें काफी बढ़ गयी हैं दूसरे शब्दों में इन पर आम लोगों का विश्वास कम होता जा रहा है , क्या कारण है इस पर थोड़ा ईमानदारी से विचार करने का प्रयास करते हैं…… मैं बार बार इस बात पर जोर देता रहता हूं कि जातक, ज्योतिष को चमत्कारिक विषय या वस्तु और ज्योतिषी को चमत्कारिक व्यक्ति के रूप में ना लें लेकिन इसमें कोई भी परिवर्तन नज़र नहीं आ रहा है, कारण दोनों में से कोई भी बदलने को तैयार नहीं है लेकिन अपवाद सभी क्षेत्रों में है और स्वाभाविक है कि यहाँ भी होगा…. पहली बात यह कि आजकल मुफ्त में कंप्यूटर या मोबाइल पर ऑनलाइन कुंडली बनाओ-कुंडली मिलान करो- कुंडली भविष्यफल जानो की भरमार है और आम तौर पर लोग इसका पूरा पूरा उपयोग भी कर रहे हैं इससे ज्योतिष और जातक दोनों का खूब नुक्सान हो रहा है..... क्या कोई कंप्यूटर किसी की सही कुंडली बना सकता है या उसकी विवेचना कर सकता है, जी बिलकुल नहीं, ऐसा मेरा व्यक्तिगत मानना है बाकी आप लोग सोचियेगा...? दूसरी बात यह कि ज्योतिष की किताब से कुछ लाइनें उठा कर सोशल मीडिया पर अपने नाम से पोस्ट करने वालों की भरमार ...

ज्योतिष जरूरी क्यों

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  ज्योतिष जरूरी क्यों (1)  यदि हम एक सरल, सुखद एवं सफल जीवन के लिए कम से कम आठवीं या दसवीं तक की शिक्षा को जरूरी मानते हैं तो ज्योतिष की कम से कम सामान्य जानकारी भी सभी को होनी चाहिए ऐसा भी हमें मानना चाहिए (2)  यदि अपने सभी कष्टों या समस्याओं के लिए सदैव दूसरों को दोष देने की प्रवृत्ति से बचना है तो स्वयं को जानना होगा और इसके लिए ज्योतिष से उत्तम माध्यम और कुछ हो ही नहीं सकता है (3)  ज्योतिष के माध्यम से ही समय समय पर दिमाग में घूमने वाले बहुत सारे भ्रमों से भी मुक्ति मिल सकती है अर्थात जीवन के रहस्यों को जानने के लिए ज्योतिष से उत्तम और कुछ नहीं (4)  ज्योतिष के माध्यम से ही दूसरों को जानने और समझने अर्थात पहचानने की क्षमता विकसित हो सकती है और तत्पश्चात जीवन में हानि को कम और लाभ को बढ़ाया जा सकता है (5)  ज्योतिष जीवन को स्पष्ट दिशा देता है और यदि समय रहते इसको विज्ञान और आध्यात्म (विवेक) का साथ मिल जाय तो निश्चित रूप से जीवन अधिक सुखदायी हो सकता है (6)  सामान्य ज्योतिष की जानकारी होने के पश्चात ही व्यक्ति कुतर्की प्रवृत्ति और बहुत कुछ खो कर थोड़ा सा ...

राशिफल का भ्रमजाल

  राशिफल का भ्रमजाल भारत में शायद ही कोई वयस्क व्यक्ति होगा जिसका प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से राशिफल से वास्ता ना पड़ा हो उसके अपने जीवन में अर्थात राशिफल से सभी लोग वाकिफ हैं  । इससे सहमत होना या ना होना अलग बात है । भारतीय ज्योतिष के अनुसार कुल 12 राशियां होती हैं और भारत की जनसँख्या को यदि 120 करोड़ मान लिया जाय तो हर एक राशि के 10 करोड़ लोग आते हैं  । अर्थात एक राशि के कम से कम 10 करोड़ लोग । राशिफल बताने वाले बताते हैं कि आज इस राशि वाले का दुर्घटना का योग है या आज इस राशि वाले को अचानक धन प्राप्ति का योग है । अर्थात उस दिन 10 करोड़ लोगों को दुर्घटना शिकार होना चाहिए या उस दिन 10 करोड़ लोगों को अचानक धन प्राप्त होना चाहिए । लेकिन सर्वविदित है कि ऐसा बिलकुल भी नहीं होता है । विशेष बात यह है कि राशिफल सूर्य या चंद्र के गोचर के हिसाब से ही बताया जाता है लेकिन कोई भी राशिफल बताने वाला यह नहीं बताता कि वह सूर्य या चंद्र में से किसके अनुसार राशिफल बता रहा है । लेकिन आधे अधूरे ज्ञान से लैस जनता अपने हिसाब से इस राशिफल को पढ़ती है । अर्थात कुछ लोग अपनी सूर्य राशि...

वास्तु का महत्त्व

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  वास्तु का महत्त्व वास्तु का नाम आते ही सामान्यतः सबसे पहले हमारे दिमाग में ईशान कोण , अग्नि कोण , मुख्य द्वार , खिड़की , दरवाजे , पूजा स्थल आदि का ध्यान आता है अर्थात मकान कैसा बना होना चाहिए लेकिन वास्तु यहीं तक सीमित नहीं है .... वास्तु को हम दो भागों में बाँट सकते हैं , पहला भवन निर्माण का वास्तु और दूसरा उसमें रहने का वास्तु ...! ------------------------ भवन निर्माण का वास्तु सामान्यतः हमारे नियंत्रण में नहीं रहता है क्योंकि अधिकांशतः लोग बना बनाया मकान लेते हैं या फिर स्थान एवं निर्माण की ऐसी विवशता होती है कि भवन निर्माण वास्तु के अनुरूप हो ही नहीं पाता है अर्थात हम चाह कर भी उसमें कुछ नहीं कर पाते हैं जबकि हमें मालूम भी होता है कि भवन निर्माण में क्या क्या और कहा कहाँ गड़बड़ है .... लेकिन जो उसमें रहने का दूसरा वास्तु है वो पूरी तरह हमारे नियंत्रण में होता है लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि हम इस मामले में सामान्यतः उदा...